सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

 


टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

  गुरु पद रज मृदु मंजुल अंजन। नयन अमिअ दृग दोष बिभंजन॥ तेहिं करि बिमल बिबेक बिलोचन। बरनउँ राम चरित भव मोचन॥1॥ भावार्थ:- श्री गुरु महाराज के चरणों की रज कोमल और सुंदर नयनामृत अंजन है, जो नेत्रों के दोषों का नाश करने वाला है। उस अंजन से विवेक रूपी नेत्रों को निर्मल करके मैं संसाररूपी बंधन से छुड़ाने वाले श्री रामचरित्र का वर्णन करता हूँ॥1॥
 25-02-2021 जय श्री राधे राधे हरि इच्छा बलवान्  <script data-ad-client="ca-pub-3634248980904619" async src="https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js"></script> . एक बार भगवान विष्णु गरुड़जी पर सवार होकर कैलाश पर्वत पर जा रहे थे। रास्ते में गरुड़जी ने देखा कि एक ही दरवाजे पर दो बाराते ठहरी थी। . मामला उनके समझ में नहीं आया। फिर क्या था, पूछ बैठे प्रभु को। . गरुड़जी बोले ! प्रभु ये कैसी अनोखी बात है कि विवाह के लिए कन्या एक और दो बारातें आई है। मेरी तो समझ में कुछ नहीं आ रहा है। . प्रभु बोले- हां एक ही कन्या से विवाह के लिए दो अलग अलग जगह से बारातें आई है। एक बारात पिता द्वारा पसंद किये गये लड़के की है, और दूसरी माता द्वारा पसंद किये गये लड़के की है। . यह सुनकर गरुड़जी बोले- आखिर विवाह किसके साथ होगा ? . प्रभु बोले- जिसे माता ने पसंद किया और बुलाया है उसी के साथ कन्या का विवाह होगा। . भगवान की बाते सुनकर गरुड़जी चुप हो गए और भगवान को कैलाश पर पहुंचाकर कौतुहल वश पुनः उसी जगह आ गए जहां दोनों बारातें ठहरी थी। . गरुड़जी ने मन में विचार कि...